Tuesday

पद्मश्री जयंत महापात्र

इस साल धोनियों और भज्जियों के बीच पद्मश्री की सूची में जयंत महापात्र का भी नाम है। बहुत देर से और कम ही सही फिर भी! वे अब 81 साल के हो चुके हैं। 'चंद्रभागा' का प्रकाशन, जहां तक मैं जानता हूं, अब स्थगित है। बहुत कुछ पहल की तर्ज़ पर। भारतीय कविता के लिए यह अपूरणीय क्षति होगी।

उनके बारे में मेरा पु्राना लेख यहां देखें|

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पुनश्च: जानता हूं ब्लॉग आजकल ठंडा है। फिर भी अगर आप यहां हैं तो धन्यवाद! एक दोस्त के शब्दों में कहूं तो - मंदी ने वॉट लगाई है रे बाबा! जल्दी मिलते रहेंगे अब, ऐसी आशा है।

Sunday

मिट्ठूचालीसा - कविता और चित्र

चित्रकला मेरा क्षेत्र कभी भी नहीं रहा। बचपन में तमाम विषय मुझे हलवा लगते थे, पर चित्रकला में बार-बार फेल होते बचता।

बहरहाल, ये चित्र मैंने 2001 में शिमला के ऊपर अपनी एक कविता के साथ बनाया। बीच में कूची कई बार फिसली, तो छोटी बहन (अरण्या) ने इसे अंतिम रूप दिया। खासतौर पर तोता तो एक बार पूरा मुर्ग़ा लगने लगा था!

चित्र को हाई-रेसोल्यूशन में देखने के लिए यहां क्लिक करें।

बताएं कुछ बन पाया क्या। वैसे तो जीवन में दुबारा ये काम न करने के अपने प्रण पर सात साल से अडिग हूं।

और हां, वो कविता - मिट्ठूचालीसा - नीचे अंग्रेज़ी में है।



Mitthhuchalisa

On a leaf rests
a drop
and from within peeps
the sun.

So what, says Mitthhu
If Hanuman did
so can I!

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From Shadows Don't Live In Walls, 2004

Saturday

शिमला 3

अर्धचक्र

एक वानर बैठा बान पर
करता आश्चर्य

किसने रंग दिया आकाश
और चिपका दिय़ा
जाखू शिखर पर?


समर्थ वाशिष्ठ

'वर्तमान साहित्य', 2001
अंग्रेज़ी में: Gyration

Tuesday

शिमला 2

साथी

एक चीड़ थामे है
अपने इकलौते शंकु को
सुन्न हाथों में
और मैं खड़ा हूं नीचे
उसके गिरने की ताक़ में।

बैठी है शंकु पर एक किरण
क्या वह भी गिरेगी?


समर्थ वाशिष्ठ

'वर्तमान साहित्य', 2001
अंग्रेज़ी में: The Escort

Monday

शिमला 1

जयसूर्य

उनींदा सूर्य
छिटककर जड़ता
चढ़ता है
अलसाए शहर पर।
छिन्न-विछिन्न हिमकणों की सेना
पुनर्जीवन पा
उड़ाती है प्रात:-किरणों की
धज्जियां
कौन कहता है
केवल ईश्वर ही
सर्वव्याप्त है?


समर्थ वाशिष्ठ
'वर्तमान साहित्य', 2001

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शिमला के ऊपर बिंब कविताओं की यह श्रृंखला 2001 में लिखी थी। आज भी इसे अपने ठीक काम में गिनता हूं। वैसे अपने काम को अच्छा या बुरा कहना कोई मायने नहीं रखता। पाठक ही किसी रचना की सार्थकता की कसौटी होते हैं।

शिमला में मेरा लगभग सारा होश-वाला बचपन बीता। आज भी वो शहर घर जैसा लगता है। ये कविताएं हालांकि शिमला छोड़ने के छ:-सात साल बाद लिखी गईं। कैसी बन पड़ी हैं ज़रूर बताएं।

Thursday

रब्बी शेरगिल का 'छ्ल्ला'

कल आधी रात जब सोने की तैयारी कर रहा था, तब टी० वी० पर रब्बी शेरगिल की नई अलबम में से 'छ्ल्ला' सुना। कमाल का गाना और उतनी ही कमाल की वीडियो। 'छ्ल्ला' हालांकि पंजाब का एक लोक-गीत है जिसे कई गायकों ने अपने अंदाज़ में गाया है। रब्बी का कमाल ये ही है कि आपके अंदर जज़्ब हो चुकी किसी धुन को एक नए रूप में पेश कर देता है। उसकी पहली अलबम में से भी 'बुल्ला की जानां' शायद अकेला ऐसा गाना है जो मैं अब अपने MP3 प्लेयर से मिटा चुका हूं। 'तोतेया मनमोतेया' और 'एक कुड़ी जिदा नां मोहब्बत' जैसे बा़क़ी गाने अब भी बहुत सुनता हूं। 'छ्ल्ला' के बोल जो सुनता आया हूं (ख़ासतौर पर गुरदास मान वाला संस्करण) से काफ़ी अलग़ लगे। क्या रब्बी ने 'जुगनी' की तरह इसे भी अपनी तरह से दोबारा लिखा है? मालूम नहीं।

बहरहाल, गाने की जिन पंक्तियों ने मुझे सबसे ज़्यादा प्रभावित किया, उनका बेकार हिंदी तर्जुमा कु्छ यूं हो सकता है:

छ्ल्ला बड़ है एक अकेला
जिसने थाम रक्खा है पल्ला
नीचे धरती का और ऊपर अल्लाह
कितनी गहरी जाती हैं उसकी जड़ें
इसका उसे ख़ुद ही नहीं पता

यूट्यूब पर यहां सुनिये और देखिए। आपको भी पसंद आएगा।

Sunday

चेन्नई 1: येशुदास की आवाज़ में हरिनावरसनम

चेन्नई से नोएडा आए आज दो महीने हो गए। जितना प्यार हमें उस शहर ने दिया, अविस्मरणीय है। अलग परिवेश और अपनी ही तरह से अनूठा भी। जीवन में मसरूफ़ सीधे-सादे लोग जिनसे हमने अंग्रेज़ी में ही बहुत कुछ बांटा। आज भी अगर जाएं तो कुछ घर ऐसे कि जिनमें बेधड़क रात को रुक पाएं। और क्या दे सकता है कोई शहर सिर्फ़ डेढ़ साल में?

बहरहाल, बहुत कुछ बताने को है, पर धीरे-धीरे। आज के लिए के० जे० येशुदास की आवाज़ में स्वामी अयप्पा के लिए ये आरती सुनिये। जब भी इसे सुनता हूं, दफ़्तर की आपा-धापी में या किसी रविवार को, बहुत शांति मिलती है। भाषा मलयालम है, फिर भी 90% संस्कृत ही। सो समझ आसानी से आ जाएगी।

अब दो शब्द स्वामी अयप्पा के बारे में। दक्षिण में हमे हिंदू धर्म का स्वरूप काफ़ी अलग मिला। अयप्पा वहां पूज्य मुख्य देवताओं में से एक हैं। उनके जन्म की कहानी भी विचित्र है। उन्हें शिव और विष्णु के मोहिनी अवतार का पुत्र माना जाता है। अयप्पा का एक बड़ा मंदिर केरल में शबरीमला में स्थित है। कहते हैं मक्का में हज से कम सबसे ज़्यादा लोग शबरीमला ही तीर्थ-यात्रा के लिए जाते हैं। साल में तकरीबन 4-5 करोड़ लोग।

शिव के बड़े बेटे कार्तिक के मंदिर भी दक्षिण में बहुत हैं। उन्हें कई नामों में मुरुगन, सर्वनन और थनिगवेल तीन हैं। जब विश्व परिक्रमा में गणेश को विजयी घोषित किया गया तो कार्तिक रूठ कर दक्षिण आ गए थे।

यहां ये जानना भी दिलचस्प है कि येशुदास (कट्टसरी जॉसेफ़ येशुदास) धर्म से ईसाई हैं। उनकी मख़मली आवाज़ दुनिया भर में पसंद की जाती है। हिंदी में भी सदमा फ़िल्म का उनका गाना सुरमई अखिंयों में आज तक किसी को भूला नहीं है। कई कट्टर दक्षिण भारतीय मंदिरों में उनका प्रवेश गैर-हिंदु होने के कारण वर्जित है। हालांकि यही मंदिर सुबह-शाम उनके गाए भजन और आरतियां बजाते हैं।

यूट्यूब पर पूरी आरती यहां सुनें। डाउनलोड करना चाहें तो MP3 मैंने यहां डाली है। 10 MB से ऊपर है, सो अच्छा होगा अगर लिंक को राइट क्लिक कर Save Target As कर लें।